आबूरोड में जिग्नेश मेवाणी जी का भव्य स्वागत

आबूरोड | गुजरात में विधायक जिग्नेश मेवाणी जी के आबूरोड आगमन पर डॉ. अंबेडकर सेवा समिति और भीम सेना तथा भीमआर्मी ने मानपुर चौराहे पर साफा व माला पहना कर स्वागत किया।





 इस मौके मेवानी ने कहा कि हम सभी बहुजनों को एकजुट होकर मनुवादी ताकतों को परास्त करना होगा। अंबेडकर सेवा समिति के विधानसभा प्रभारी गणपत मेघवाल, अंबेडकर सेवा समिति के तहसील अध्यक्ष राजेंद्र परमार, डॉ. राम मीणा,  अंबेडकर सेवा समिति तहसील अध्यक्ष पिंडवाड़ा मांगीलाल परिहार, प्रवीण चौहान ने भी विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन कैलाश डांगी ने किया।
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कार्यक्रम में अंबेडकर सेवा समिति के तोलाराम मेघवाल, दिनेश परमार, प्रेम मिरल, भुपेन्द्र कुमार, गणपत अहम्पा, भागीरथ, पूर्व पार्षद नवीन सांखला, माधव मारू,विष्णु ,अमराराम मेघवाल आदि मौजूद थे। 

बलात्कार व अत्याचार के खिलाफ कैंडल मार्च17अप्रैल को

आबूरोड़- सभी साथियों को सूचित किया जाता है कि देश में अपनी बहन & बेटीयो  के साथ बढ़ रहे बलात्कार व अत्याचार के खिलाफ दिनांक 17अप्रैल
2018 को शाम 5 बजे रेलवे स्टेशन , आबुरोड में कैंडल मार्च का आयोजन किया जाएगा तो आप सभी भाई -बंधुओ से निवेदन है कि आप समय पर पधारकर कैंडल मार्च आयोजन को सफल बनावें ।
निवेदक - भीम आर्मी , आबुरोड ।
सम्पर्क सूत्र - 9783518060,
9672944772,
9694989529,
9057218584

प्रतिभा सम्मान समारोह 8 अप्रैल को

आबूरोड़ - अंबेडकर सेवा समिति व भीम सेना आबूरोड़ के संयुक्त तत्वाधान में प्रथम जिला स्तरीय भीम प्रज्ञा सम्मान समारोह व स्नेह मिलन कार्यक्रम 8 अप्रैल को प्रातः 1O बजे से विष्णु टॉकिज केसरगंज आबूरोड़ में आयोजित होगा ।
Bhim army
Bhim army @bhimvarta
माननीय भंवर मेघवंशी , माननीय प्रेमाराम देवासी, माननीय मोईनुदीन खान के आतिथ्य में SC,ST,OBC तथा अल्पसंख्यक प्रतिभाएं सम्मानित होगी
Aburoad pratibha smman samaroh
Aburoad news
Aburoad bhim army

Sc/st act मेंं बदलाव के विरोध मेंं आबूरोड़ बंद सफल

SC ST ऐप्स के बदलाव में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में आबूरोड सफल बंद रहा ।




आबू रोड को बंद करवाने में भीम सैनिकों ने बढ़-चढ़कर चढ़कर भाग लिया 1 अप्रैल शाम को बाइक रेली निकालकर भारत बंद में समर्थन मांगा 2 अप्रैल सुबह 6:00 बजे से आंबेडकर चौक मानपुर में भीम सैनिक एकत्रित होकर रैली प्रारंभ की जो साईं बाबा मंदिर होते हुए मैन बाजार , सदर मार्केट से सातपुर तक फिर सातपुर से डाक बंगले तक रैली निकाली तथा डाक बंगले में SDM को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया । रैली में करीबन 2500 से ज्यादा भीम सैनिकों ने भाग लिया सबके हाथों में नीले झंडे माथे पर नीला तिलक सिर पर जय भीम, संविधान विरोधी बात छोड़ो नारे वाली टोपी लगाकर "जब जब जुल्मी जुल्म करेगा सत्ता के हथियारों से चप्पा चप्पा गूंज उठेगा जय भीम के नारों से" बोलते हुए पूरे जोश में रैली निकाली । रैली में अंबेडकर सेवा समिति के अध्यक्ष राजेंद्र परमार , तोला राम मेघवाल ,गणपत मेघवाल, प्राचार्य आशुतोष मीणा, लालाराम गरासिया , गंगाबेन गरासिया , तथा भीम आर्मी के अध्यक्ष खेमराज परिहार , प्रेम मिरल , भूपेंद्र कुमार , धारू राम बोस, गजेंद्र मेघवाल, मनीष गहलोत, नकुल मेहरा ,संग्राम राणा ,गणपत लाल अहम्पा ,जामता राम केम्पाल ,सुरेश कोली ,नेनाराम अहम्पा इत्यादि सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

भीमआर्मी की बैठक 1अप्रैल को

🙏🙏भीम आर्मी  आबुरोड🙏🙏🙏🙏
 
    समस्त युवा साथियो,बहुजन समाज के कर्णधार बुद्धिजीवी वर्ग,बहुजन समाज के पुज्नीय व सलाहकार {SC,ST,OBCअल्पसंख्यक} से निवेदन है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी 14अप्रेल संविधान निर्माता बाबासाहब जयन्ति समारोह की पुर्व तैयारी के लिए दिनांक 01/4/2018 रविवार को बैठक रखी गयी है,अत:आप सभी साथियों को पुन:निवेदन है कि इस दिन आप सभी अपना कीमती समय निकालकर जरूर पधारे व आपकी राय व सहयोग दे।समय सुबह 9.00 बजे
स्थान - ऋषिकेश रोड, गणेश मंदिर , मानपुर आबुरोड 
निवेदक:- भीम आर्मी आबुरोड ।
Contact No. 9783518060 ,
                      9057218584 ,
                      9672944772,
                      9694989529

Hardik pandya ke khilaf FIR

जोधपुर / - जोधपुर की एक निचली अदालत में हार्दिक पंड्या के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं
. यह मामला भारतीय संविधान निर्माता बीआर अंबेडकर के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने से संबंधित है.

SC, ST एक्ट में हुआ बड़ा बदलाव, जानेंं क्या थी इसकी ताकत

11 सितंबर 1989 को राजीव गांधी की सरकार द्वारा संसद के पटल पर एक विधेयक रखा गया जो निम्न प्रकार था

”अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए तमाम सामाजिक आर्थिक बदलावों के बावजूद उनकी स्थिति बेहतर नहीं हुई है । क्रुरता के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें उन्हें अपनी संपत्ति के साथ जान भी गंवानी पड़ी है ।जब भी ये लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं और किसी गलत बात का विरोध करते हैं, ताकतवर लोग उन्हें डराने की कोशिश करते हैं. जब भी एससी-एसटी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग अपनी और अपनी महिलाओं के आत्मसम्मान की बात करते हैं, प्रभावशाली लोग उन्हें अपमानित करते हैं। ऐसी स्थितियों में सिविल राइट ऐक्ट 1955 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में किए गए प्रावधान उन्हें न्याय दिलाने में कमजोर पड़ रहे हैं। गैर एससी-एसटी लोगों की ओर से एससी-एसटी समुदाय के लोगों पर किए जा रहे अत्याचार को चिह्नित करने में दिक्कत आ रही है । ऐसे में ज़रूरत इस बात की है कि उनके खिलाफ होने वाले अत्याचार को परिभाषित किया जाए और ऐसे लोगों को सजा देने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं ।इसके अलावा राज्य और संघ शासित प्रदेश भी एससी-एसटी की सुरक्षा के लिए कानून बनाएं और जिसके साथ अत्याचार हो, उनके पुनर्वास की व्यवस्था करें.”

इन दलीलों के साथ केंद्र सरकार ने संसद में एक विधेयक पास किया. जिसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 कहा गया । संसद से पास होने के बाद इस विधेयक पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिए, जिसके बाद 30 जनवरी 1990 को इस कानून को जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू कर दिया गया ।इसके बाद अप्रैल 2016 में केंद्र सरकार ने इस कानून में कुछ संसोधन किए। इन संसोधनों के साथ 14 अप्रैल 2016 से इस कानून को फिर से लागू किया गया ।

किस पर लागू होता है ये कानून

ये कानून देश के हर उस शख्स पर लागू होता है, जो अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) का सदस्य नहीं है. अगर ऐसा कोई शख्स एससी-एसटी से ताल्लुक रखने वाले किसी शख्स का उत्पीड़न करता है, तो उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत कार्रवाई की जाती है.

क्या करता है ये कानून

अगर कोई शख्स किसी भी तरह से किसी अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंध रखने वाले किसी शख्स को प्रताड़ित करता है, तो उसके खिलाफ ये कानून कम करता है. और उस अपराध के लिए आईपीसी की धाराओं के अलावा इस कानून के तहत भी सजा भुगतनी होती है. इसके अलावा ये कानून पीड़ितों को विशेष सुरक्षा देता है. इस कानून के तहत पीड़ित को अलग-अलग अपराध के लिए 75,000 रुपये से लेकर 8 लाख 50 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है. साथ ही ऐसे मामलों के लिए इस कानून के तहत विशेष अदालतें बनाई जाती हैं जो ऐसे मामलों में तुरंत फैसले लेती हैं. इस ऐक्ट के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पीड़ितों को राहत राशि और अलग से मेडिकल जांच की भी व्यवस्था है. एससी-एसटी के खिलाफ मामलों में पीड़ितों को अपना केस लड़ने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी दी जाती है.

किस-किस अपराध के लिए लागू होता है एससी-एसटी ऐक्ट

# अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लोगों को अपमानित करना. उन्हें जबरन मल, मूत्र खिलाना.

# एससी-एसटी के किसी सदस्य का सामाजिक बहिष्कार.

# किसी एससी-एसटी के साथ कारोबार से इन्कार

# किसी एससी-एसटी को काम न देने या नौकरी पर रखने से इन्कार करने

# किसी एससी-एसटी को किसी तरह की सेवा देने से इन्कार करने



# अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य से मारपीट करना.

# उनके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करना या फिर उन्हें किसी भी तरह से परेशान करना.

# एससी-एसटी समुदाय के किसी शख्स के कपड़े उतारकर उसे नंगा करना या फिर उसके चेहरे पर कालिख पोतना.

# किसी भी तरह से सार्वजनिक तौर पर अपमानित करना.

# जमीन पर जबरन कब्जा करना, गैरकानूनी ढंग से किसी जमीन को हथिया लेना.

# किसी एससी-एसटी समुदाय के शख्स को भीख मांगने के लिए मजबूर करना

# उसे बंधुआ मजदूर बनाना

# वोट देने से रोकना या किसी खास को वोट देने के लिए बाध्य करना.

# किसी महिला को अपमानित करना

# किसी सार्वजनिक जगह पर जाने से रोकना

# अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अपना मकान छोड़ने पर मजबूर करना

ये सब ऐसे अपराध हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कार्रवाई होती है. लेकिन अगर ये अपराध किसी एससी-एसटी के समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शख्स के साथ होता है, तो उसमें आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत भी कार्रवाई होती है.

कितनी होती है सजा

आईपीसी की सजा के अलावा एससी-एसटी ऐक्ट में अलग से छह महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा और जुर्माने की व्यवस्था है. अगर अपराध किसी सरकारी अधिकारी ने किया है, तो आईपीसी के अलावा उसे इस कानून के तहत छह महीने से लेकर एक साल की सजा होती है.

अगर अपराध किसी सरकारी अधिकारी ने कियाा है तो…

अगर कोई सरकारी अधिकारी एससी-एसटी वर्ग से ताल्लुक नहीं रखता है और वो जानबूझकर किसी एससी-एसटी समुदाय के शख्स को परेशान करता है, तो उसे छह महीने से लेकर एक साल तक की जेल हो सकती है. किसी सरकारी अधिकारी पर केस तभी दर्ज किया जा सकता है, जब पूरे मामले की जांच के दौरान सरकारी अधिकारी दोषी पाया गया हो.

विशेष अदालत की है व्यवस्था

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत विशेष अदालतों की भी व्यवस्था है. अधिनियम की धारा 14 के तहत इस कानून के तहत दर्ज केस के ट्रायल के लिए विशेष अदालत की व्यवस्था की गई है, जो हर राज्य में बनी हुई है.

क्या होती है केस दर्ज होने के बाद की प्रक्रिया

अगर किसी के खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज होता है, तो पुलिस उस शख्स को तुरंत गिरफ्तार कर लेती है. इस केस में किसी तरह की अग्रिम जमानत नहीं मिलती है. गिरफ्तारी के बाद जमानत निचली अदालत नहीं दे सकती है, सिर्फ हाई कोर्ट ही जमानत दे सकती है. इसके अलावा किसी शख्स की गिरफ्तारी के 60 दिन के अंदर पुलिस को चार्जशीट दाखिल करनी होती है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद पूरे मामले की सुनवाई विशेष अदालत में होती है, जो एससी-एसटी के मामलों की सुनवाई के लिए बनी होती है।

अब क्या होगा ????


सुप्रीम कोर्ट  20 मार्च को बड़ा बदलाव किया इसके तहत-
1.एससी-एसटी ऐक्ट के मामलों की जांच डिप्टी एसपी अधिकारी करेंगे. पहले ये जांच इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करते थे.
2.किसी भी सरकारी अधिकारी पर केस दर्ज होने पर ही उसकी गिरफ्तारी तुरंत नहीं होगी. उस सरकारी अधिकारी के विभाग से गिरफ्तारी के लिए इजाजत लेनी होगी.
3.अगर किसी आम आदमी पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज होता है, तो उसकी  गिरफ्तारी तुरंत नहीं होगी. उसकी गिरफ्तारी के लिए जिले के एसपी या एसएसपी से इजाजत लेनी होगी.
4.किसी पर केस दर्ज होने के बाद उसे अग्रिम जमानत भी दी जा सकती है. अग्रिम जमानत देने या न देने का अधिकार मैजिस्ट्रेट के पास होगा पहले अग्रीम तो क्या जमानत भी हाई कोर्ट देता था.

आगे क्या होगा ???

मनुवादी  सरकार को पता हैं किआरक्षण को अचानक हटा  दिया जाए तो दंगा हो जाएगा इसलिए ये धीरे धीरे से आरक्षण को हटाने की कोशिश मेंं हैं पहले double roster reservation को हटाया और अब sc/st act को प्रभावहीन कर दिया
जागो अब तो जागो

विदेश की धरा पर छा गया भीम पुत्र

खुडाला /फालना - डॉक्टर हिमांशु चौहान सुपुत्र श्री डॉक्टर  श्री किरण जी चौहान अपने सरगरा समाज के साथ दलित समाज का नाम रोशन कर मिसाल पेश की
 डॉक्टर हिमांशु ने मेडिकल कॉलेज केमरान रूस में छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर मनुवादियों की बोलती बंद कर दी
भीम वार्ता की तरफ से हिमांशु जी को हार्दिक बधाई तथा उज्जवल भविष्य की कामना के साथ जय भीम

मेघ गर्जना meghwal poem

मेघ बरसे मानव हर्षे  , हर्षे ऋषि मुनी ओर देव |
सन्त महात्मा सभी पुकारे , करो मेघ कि सेव ||

आँखें खोलो सुस्ती छोड़ो ,
 ताकत से बिगुल बजा रे |
जागो मेघवंशीयों जागो ,
सोए सिंह जगाओ रे ||
भाग्य हमारा खर्राटों मे अलगाओं कि चादर फेंको ,
अलसाई आँखों को मसलो एक सुनहरा सपना देखो |

  1. मेघ रिखिया मेहर बलाई मेघवाल वही नाम अनेकों |

कोस कोस नाम बदलता नामों पर मत  रोटी सेको ,
राष्ट्र पटल पर एक मंच पर एक नाम से आओ रे ||
हम बेटे हैं मेघ ऋषी के अंचल अंचल लेबल बदलो ,
आजदी को अरसां बीता थोड़ा थोड़ा अब तो संभलो |
लाल किले तक बढें कारवां अगंड़ाई हो इतना दम लो ,
हक हाशिल करना पड़ता है इक हुन्कार लगाओ रे ||
सृष्टि रची तब ब्रह्माजी को ताना बाना दिया वो हम ही थे ,
संत कबीरा रविदास और जोधल रामा पीर हम ही थे |
माया मेघ जीवणा दासी वीरभान सतनामी हम ही थे ,
गोकुल गरीबा घासी संत हमारे कहाँ नम थे ||
ओ तिरंगा बुननें वालों ,
तीन दिशा मत जाओ रे |
जागो मेघवंशीयों जागो ,
सोए सिंह जगाओ रे ||

This poem written by MASTER BHERARAM MEGHWAL

मास्टर भैराराम मेघवाल जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय अनुसूचित जाति समन्वय समिति बाडमेर और पूर्व राजस्थान प्रदेश प्रभारी राजपा दिल्ली तथा पूर्व निर्दलीय लोकसभा उम्मीदवार 2014 बाडमेर जैसलमेर

आबूरोड में हुआ भीम आर्मी का गठन

आबुरोड़ :- तलहटी मे भीम आर्मी का गठन किया गया ।






जिसमें सिरोही भीम आर्मी के जिला प्रभारी राजेंद्र जी की उपस्थिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, महामंत्री, प्रभारी, कोषाध्यक्ष, संगठन मंत्री, मीडिया प्रभारी मनोनीत  किय गये।
अध्यक्ष- खेमराज परिहार
                 भारजा
उपाध्यक्ष- भुपेन्द्र कुमार
                 रानीवाड़ा
सचिव- धारूराम बाॅस 
          राऊता (बागोड़ा)
महामंत्री- गजेन्द्र परिहार
        बिजलिया (बागोड़ा)
प्रभारी- मनीष गहलोत
कोषाध्यक्ष- नकुल मेहरा
संगठन मंत्री- संग्राम राणा वालोरिया
मीडिया प्रभारी- प्रेम मिरल बाड़मेर
      

डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के बारे में तख्य जो हर मूलनिवासी को पता होना चाहिये



उस देश के राष्ट्पति को जो सात समन्दर पार रहते हुए भी, उस देश के न होते हुए ईमानदारी  से सर्वे कराया

जो कार्य भारतीय सरकार को करना चाहिए था, पर नही किया ।
चाहे *कांग्रेस* की सरकार हो या *बीजेपी*

वह कार्य *अमेरिका* ने कर दिखाया ।

*🗽अमेरिका🗽* के विश्व प्रसिद्ध
*कोलंबिया यूनिवर्सिटी* मेँ मुख्य दरवाजे के अंदर कि ओर जिनका फोटो लगाया गया है।

वो है *— डॉ. भीमराव अंबेडकर जी —*

👇 *Point Note Down* 👇

वहाँ ऐसा लिखा हैं,

हमे गर्व है कि, ऐसा छात्र हमारी यूनिवर्सिटी से पढकर गया है.. और उसने भारत का संविधान लिखकर उस देश पर बड़ा उपकार किया है !

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 300 साल पूरे होने के उपलक्ष्य मेँ, पूरे 300 सालो मेँ इस यूनिवर्सिटी से सबसे होशियार छात्र कौन रहा ? इसका सर्वे किया गया !

उस सर्वे मे 6 नाम सामने आए
उसमे नं. 👇1⃣👇 पर नाम था*
*— डॉ. भीमराव अंबेडकर जी —*

बाबा साहेब के सम्मान मेँ कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मुख्य दरवाजे पर, उनकी कांस्य प्रतिमा लगायी गयी, उस मूर्ती का अनावरण अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा के करकमलो से किया गया !

👇उस मूर्ती के नीचे लिखा गया है👇
📚 *"सिम्बॉल ऑफ नॉलेज"* 📚
  📖 *यानि ज्ञान का प्रतीक* 📖


*चाय बेचने वाले मोदी*
*Prime Minister बने.....*
सबने सब को बताया

लेकिन कभी किसी ने ये नही बताया...

*Class Room* के बाहर बैठकर पढने वाला
एक दलित बालक
*डा• भीम राव अम्बेडकर*
इस देश का शिल्पकार
*संविधान निर्माता* बना.....

और सबसे बढकर इस ससांर में
*''सिबंल आफॅ नाॅलेज''* बना...

बाड़मेर में बाबासाहेब जयंती के पूर्व संध्या पर रक्तदान शिविर आयोजित

बाबा शाहब डॉ भीमराव अम्बेडकर की 126 वीं जयंती के उपलक्ष में राजकीय चिकित्सालाय बाड़मेर में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ 
छात्रसंघ अध्यक्ष तोगाराम मेघवाल नें फेसबुक पर समस्त समाज बंदुओं का दिल की गहराई से आभार व्यक्त किया 









जोधपुर उम्मेद स्टेडियम में मनाई बाबा साहेब जयंती

ये फोटोज भाई साहेब Ramlal Saheliya नें शेयर किया हैं 











ये  फोटो Prem Virash जी नें शेयर किया हैं 


सांचोर में धूमधाम से मनाई आंबेडकर जयंति

सांचोर में आंबेडकर जयंती के पल




फोटो डॉ. सुखराम मेघवाल ने शेयर किया हैं

Barmer BHIM JAYANTI KI jhanki


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